❤️श्री ब्रजचन्द्र❤️

 
❤️श्री ब्रजचन्द्र❤️
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कृपा मैं जानी अब ब्रज भूप।” श्री ब्रज धाम में वास करने के अद्भुत सुख को अनुभव करते हुए बिहारिन देव जु श्री बांके बिहारी जी को कह रहे हैं की "हे ब्रजभूप! आपकी मुझ पर कितनी कृपा है, इस बात को अब मैं भली-भांति जान गया हूँ।” “लीनौं हरि गहि बाहु महाबल रति संश्रित भै कूप।।” मैं तो इस भय-भ्रमरूपी संसार के कुएं में ही रमा हुआ था और सुख मान रहा था परंतु आपने बलपूर्वक मेरे हाथ को पकड़ कर मुझे इस संसारी कुऍं से निकाल कर अपने चरणों में लगा लिया। “मिटि गये पाप संताप ताप तन चितवत स्याम सरूप।” आपके दर्शन करते ही मेरे समस्त पाप, ताप, संताप भली-भांति मिट गए। “श्रीबिहारीदास गुन कहै कहाँ लौं उपमा अमित अनूप।।” श्री बिहारिन देव जु कह रहे हैं की “जिनके गुणों का वर्णन स्वयं वेद नहीं जान पाए हैं, सृष्टि में जिनकी कोई उपमा ही नहीं है, ऐसे आपके गुणों को मैं कहाँ तक वर्णन कर सकता हूँ।” - श्री बिहारिन देव जु, सिद्धान्त के पद (141) “Kripa Main Jaani Ab Braj Bhoop” While residing in Shri Vrindavan Dham and remembering the grace of Shri Banke Bihari, Shri Biharin Dev states in this verse, Oh King of Braj, I have accepted from the bottom of my heart that you have an enormous grace upon me. “Leenaun Hari Gahi Baahu Mahaabal Rati Sanshrit Bhai Koop” My heart was attached towards this material world which is like a fearful well, but due your causeless grace, you have forcibly taken me out from it, with your own hands. “Miti Gaye Paap Santaap Taap Tan Chitavat Syaam Saroop” Oh Shri Bihariji, merely your glimpse (darshana), rectified my sins, extinguished the blazing fire of my heart, and destroyed the the triad of pain - extrinsic, intrinsic and superhuman. “Shribiharidas Gun Kahai Kahaan Laun Upama Amit Anoop” Shri Biharin Dev Ji says, "Oh Shri Banke Bihari, Your glory knows no bounds, it's impossible for me to describe and put it into words". - Shri BiharinDev Ju, Siddhaant Ke Pad
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