★श्रीराधा मदनमोहन★

 
★श्रीराधा मदनमोहन★
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मधुरीसी बेन बजायके । मेरो मन मोह्यो सांवरा ॥ध्रु०॥ मेरे आंगनमें बांसको बेडलो सिंचो मन चित्त लायके । अब तो बेरण भई बासरी मोहन मुखपर आयके ॥सां०॥१॥ मैं जल जमुना भरन जातरी मारग रोक्यो आयके । बनसीमें कछु आचरण गावे राधेको नाम सुनायके ॥सा०॥२॥ घुंघटका पट ओडे आवें सब सखियां सरमायके । कहां कहेली सहेली सासु नणंदी घर जायके ॥सां०॥३॥ सूरदास गोकुलकी महिमा कबलग कहूं बनायके । एक बेर मोहे दरशन दीजो कुंज गलिनमें आयके ॥सां०॥४॥
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