❤❤श्रीराधा वृन्दावनबिहारी❤❤

 
❤❤श्रीराधा वृन्दावनबिहारी❤❤
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राधा स्याम की प्यारी । कृष्न पति सर्वदा तेरे, तू सदा नारी ॥ सुनत बनी सखी-मुख की, जिय भयौ अनुराग । प्रेम-गदगद, रोम पुलकित,समुझि अपनौ भाग ॥ प्रीति परगट कियौ चाहै, बचन बोलि न जाइ । नंद-नंदन काम-नायक रहे, नैननि छाइ ॥ हृदय तैं कहुँ टरत नाहीं, कियौ निहचल बास । सूर प्रभु-रस भरी राधा, दुरत नहीं प्रकास ॥
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