❤श्री राधा ब्रजराज❤

 
❤श्री राधा ब्रजराज❤
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मधुरी सी बेन बजाय के । मेरो मन मोह्यो सांवरा ॥ध्रु०॥ मेरे आंगन में बांस को बेडलो सिंचो मन चित्त लाय के । अब तो बेरण भई बासरी मोहन मुख पर आय के ॥ १॥ मैं जल जमुना भरन जात री मारग रोक्यो आय के । बनसी में कछु आचरण गावे राधे को नाम सुनाय के ॥२॥ घुंघट का पट ओडे आवें सब सखियां सरमाय के । कहां कहेली सहेली सासु नणंदी घर जाय के ॥३॥ सूरदास गोकुल की महिमा कब लग कहूं बनाय के । एक बेर मोहे दरशन दीजो कुंज गलिन में आय के ॥ ४॥
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